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भजु रे मन भलुनी भवानी: हरेश्वर राय

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नीयराइल बा फेर से चुनाव भजु रे मन भलुनी भवानी। कउअन के होई कांव कांव।।भजु...।। पांच बरीस प साजन अइहें संगे संगे गोधन के ले अइहें गांवें- गांवें होई मन- मोटांव।।भजु...।। गर में गेना के माल पहीरले धोतीखूंटा के जेबी में डरले फेंकरत फिरीहें गांवें- गांव।।भजु...।। कबो धुआं जस मुंह बनइहें आपन जूत्ता अपनहीं खइहें चलत रहीहें नया नया दांव।।भजु...।। जीतीहें जइहें फेरू ना अइहें लूटीहें कूटीहें आ पीहें खइहें पूछीहें कब्बो ना नांव- गांव।।भजु...।। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

मन उदास बा: हरेश्वर राय

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सुखात नदी जस मन उदास बा। असरा के चान प लागल बा गरहन सपना के पांखी प घाव भइल बड़हन डेगे डेग पसरल खाली पियास बा। आंखी के बागी में पतझड़ के राज बा मन के मुंड़ेरा प गिर रहल गाज बा उदासी के गरल से भरल गिलास बा। हंसी के फूल प उगि आइल सूल खुसी के खेत में बा जामल बबूल केकरा के कहीं गैर के आपन खास बा। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

इहे हाल चाल बा: हरेश्वर राय

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गईंया के पकड़ी प बइठल बा गीध मुस्किल मनावल बा होली आ ईद। खेतन में एह साल फूटल बा भूआ सहुआ दुआरी पर बइठल बा मूआ। चूल्हन के फोरि फोरि माटी बंटाईल आगन के छाती बा चरचर चिराईल। मेहरि के ठेहुन के तेल सुखाइल बा बेटी के आंख में माड़ा फुलाइल बा। मू गइले बाबू हमार भइल ना दवाई माई के पिनसीन प होखता लड़ाई। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

नारायण नारायण नारायण: हरेश्वर राय

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बिली सब दिल्ली गइली सन, कुक्कुर कासी धाम गदहा सभ घोड़ा भइलन स, गटक गटक के जाम सिरिमन नारायण नारायण नारायण.. सिरिमन...। जवन मुंह जुतिआवे लाएक, बड़ कचरत बा पान उल्लू के पट्ठवन भीरिए सभ, सिरी उधव के ज्ञान सिरिमन नारायण नारायण नारायण.. सिरिमन...। जेकर कुरुतवा जतने लमहर, ओतने दाम हंसोथे जे कबहूं ना बोवल खेंसारी, सभकर बूंटवा चोंथे सिरिमन नारायण नारायण नारायण.. सिरिमन...। जेही लगावत फेंड़ बबुरी, चाभ रहल मलगोफ्फा जे बंसखटिया के लाएक ना, तूर रहल बा सोफा सिरिमन नारायण नारायण नारायण.. सिरिमन..। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

अंदर के बाघवा जगावे चलीं: हरेश्वर राय

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थीर पानी में छिछिली कटावे चलीं कोना कोना से जाला हटावे चलीं। जदी अंगुरी अंगार से बचावे के बा ठोस लोहा के सिउंठा बनावे चलीं। मनवां उड़े के बाटे आकसवा में तs चलीं बझवन से पंजा लड़ावे चलीं। कारी रतिया के करे दुरगतिया बदे चलीं अंजुरी में सुरुज उठावे चलीं। अगर जीए के बड़ुए त लड़हीं पड़ी चलीं अंदर के बाघवा जगावे चलीं। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

हिपिप हुर्रे हुर्रे: हरेश्वर राय

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गउआं सहरियो से आले हिपिप हुर्रे हुर्रे गारी भरल बा गालेगाले हिपिप हुर्रे हुर्रे। सतुआ घुध्धुनिआ के मोलवा खतम बा चलsतरुए ढोसा मसाले हिपिप हुर्रे हुर्रे। माई बाबू अपना बुढ़उती के लठिआ से भोरे भोर रोजहीं कुटाले हिपिप हुर्रे हुर्रे। रिस्ता ना बांचल बा तलवा तलइयन से पाइप से भुअरी धोआले हिपिप हुर्रे हुर्रे। ढेरी के ऊपरा बढांव बब्बवा बइठल बा नीचवा से रोज मूस चाले हिपिप हुर्रे हुर्रे। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

बिधाएक हो गइल: हरेश्वर राय

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बिधाएक हो गइल जी, बिधाएक हो गइल रहे नकटा नालायक जी बिधाएक हो गइल। एमेबीएफ कइके नकटा घोंके लागल पउवा खाए लागल मुरगा मुरगी खंसी पाठी कौआ टोल मुहल्ला खातिर उ दुखदाएक हो गइल। चेला चटिया बनले ओकर चोर उचक्का ढेरो गैंड़ा के कुछ खेत हटाके लेलस कीन बलेरो उ बीर बहादुर एम पी के सहाएक हो गइल। मोहे लेचल पटिआ के त मिलल ओके टिकट पोलिंग दिने हरेक बूथ प भइल लड़ाई बिकट भारी मत से जीत के नक्कट नाएक हो गइल। गाड़ी साड़ी कुल्हि मिलल मिलले ढेरो संतरी लाद के सोना घूमे लागल अपना गतरी गतरी अब एक नमर के नकटा खलनायक हो गइल। नोट: १.एमएबीएफ= मैट्रिक अपीयर्ड बट फेल्ड। २. मोहे लेचल= पाटी के नांव ह। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.