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मोर दिलवा बसेला दिलजानी में: हरेश्वर राय

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मोर दिलवा बसेला दिलजानी में। बनिके कोइलिया कबो गीत गावस बनिके हरिनिया ऊ उधम मचावस बनिके पुरवा घुसेली पलानी में। फूलवा के रुप धइ कबो इतराली सरग के चानवा कबहूं बन जाली कबो बहेली नदिया के पानी में। फागुन में आवेली बनिके बहरवा कलीन के बांटेली रंग चटखरवा कबो मुसुकी मारेली गुरुबानी में। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

कक्काजी: हरेश्वर राय

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कतना करीं बड़ाई कक्का रउआ बड़ी महान हईं। अइसन चाल चलीला जेकर, खोजे ना मिले काट चानी- सोना से बकसा फाटे, पहिन चलीला टाट पागल गज के ऊपर बैठल कक्का रउरा पिलवान हईं। फूलवा में बैठल नाग रवा, आस्तीन के सांप रवा रउरा अपने में आप हईं, आ माहील के बाप रवा आग लगावेवाली रउरा माचिस के दोकान हईं। दउरि दउरि के पीअले बानी, पनिया घाटे-  घाट खटिये बैठल रावा लगाईं, गजब- गजब के साट छक्का पर छक्का मारीला कक्का रउरा कप्तान हईं। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

एगो उगल बा चान: हरेश्वर राय

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एगो उगल बा चान पिछुआरी में। आम मोजराइल आ महुआ कोचाइल कोइली के बोली में मिसिरी घोराइल आके पसरल बसंत फुलवारी में। पियरी पहिनलस बधरिया गुजरिया चह - चह भइली सांवरो बंसवरिया चोन्हाए लगली पुरवा बधारी में। चाक जस नाचता मोर फुलवरिया दुअरा प बरसता रंगवा अबिरिया झारsतारी असीस भउजो गारी में। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

फुटानी में: हरेश्वर राय

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फुटानी में जी फुटानी में गइली हमरी जवानी, फुटानी में। मति उपरजनी ना हरि नाम जपनी माई मेहरिया के नाक कान बेंचनी हेललि- हेललि भंइसिया पानी में। देसवा समजवा के सेवा ना कइनी खेते -खरिहानी में कबहूं ना गइनी लगवनी खाली माजमा दलानी में। बाबूजी कुफुती चिलारी प गइलन खूंटी पर नाधा आ जोती टंगइलन हांथ मलत बानी बैठल चुहानी में। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

किरिन बबीहरेश्वर राय

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खुला बा जंगला किरिन बबी आवs। लेवा पुरान बा ठंढा बिहान बा कमरा के देहीं में ईचको ना जान बा मनवा बेराम बा माथ सहलावs। कंडा ओराइल बोरसी सेराइल मति हेराइल बा मन बा डेराइल आंखी समा जा पपनी उठावs। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

दहेज: हरेश्वर राय

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बेटा के बापवा बनल बा कसाई। बबुनी के बाबू के होखता चुसाई।। दहेज में मंगातरुए उड़नखटोला। हीरवा मंगातरुए दस बीस तोला।। बेटा गंजेड़ी खतिरा चाहीं जहाज। गूंग बहीर भइल बा सरबे समाज।। ई सब देख सुन फाटे मोर कपार। मन करे घोंपि लीं सीना में कटार।। सवाचल जरुरी बाटे एकर दवाई। ना त मरजवा ई खोरि खोरि खाई।। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

सरस्वती वंदना: हरेश्वर राय

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कर जोरि बिनती करीला सुरसती मोरी मईया जी हे वीणापाणि! होखीं ना सहईया मोरी मईया जी। अज्ञान के अन्हरवा अंबिका लिखत बा बरबदिया  सुर-ताल मतिया के माई हो होखत बा दुरगतिया डूबत बिया नदिया बीचवा नईया मोरी मईया जी। हम मुरुख अज्ञानी बानी ज्ञान के ज्योति जला दीं हमरी जेठ जिनिगिया मईया सुंदर फूल खिला दीं हे माहमाया! परत बानी पईंयां मोरी मईया जी।   आरे आंखि अछइत ए अम्बे! भईल बानी आन्हर भरल बा जिनिगिया में मईया खाली डील- डाबर दीं ना कुल्हि मरजवन के दवईया मोरी मईया जी। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.