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जरूर कवनों बात बा

जरूर कवनों बात बा काँव काँव कर तरुए काग अंगनैया जरूर कवनों बात बा दैया हो दैया जरूर कवनों बात बा। मूसवा बिलरिया में बढ़ल बा इयारी बघवा बकरिया के कहत बा पियारी सारि घर में राति भर रोवतारी गैया जरूर कवनों बात बा। सबूजी कबूतरी चुगत नइखे दाना मैना के गर से फूटत नइखे गाना हमरा हिरामन के धइलस जड़ैया जरूर कवनों बात बा। साँझी खा चुरइल बोलेले पिछुअरिया रतिया बिरतिया कुहुक्के कोइलरिया खोंता तेयाग भागल कल्हियाँ गोरैया जरूर कवनों बात बा। - हरेश्वर राय, सतना

हम ना अइबों रे

हम ना अइबों रे हम ना अइबों सुनु रे भगता हम ना अइबों रे तोर देश भइल कल्युगी भगता हम ना अइबों रे। नाहीं गोप गोबरधन कतहूँ ना गोपी ना जमुना पोले-पोले खाली लुगी भगता हम ना अइबों रे। लउकत नइखन वृंदावन में एकहूँ गइया बाछा लउकें सुसुकत सुगा-सुगी भगता हम ना अइबों रे। मोरपंख मक्खन मिसिरी ना नाहिं कदम के डार चारु देनिए झुग्गी-झुगी भगता हम ना अइबों रे। समरसता में रोज लगावत बड़ुए लोगवा आगी बाजे झूठवा के डुगडुगी भगता हम ना अइबों रे। - हरेश्वर राय, सतना

एक बेर भठयुग में पधारीं

एक बेर भठयुग में पधारीं राउर नउआँ नन्दकुमार गोबर्धनधारी ए हरी रउरे हईं किसन मुरारी रास बिहारी ए हरी। राउर जनम भूमि हे केशव हउवे मथुराधाम स्याम रंग बदरी से लेके हो गइनी घनस्याम रउरे पार्थ सारथी मधुसूदन चक्रधारी ए हरी। कंसारी गोबिंदा छलिया मोहन मदन मनोहर मायापति माधव रउरा जी बनवारी मुरलीधर कंसन असुरन के नास करीं असुरारी ए हरी। यादवेन्द्र गिरधर गोपेश्वर योगिपति अघहारी देवकी नंदन रास रचईया रउरा कुंज बिहारी एक बेर भठयुग में पधारीं लीलाधारी ए हरी। - हरेश्वर राय, सतना

आफातारा में

आफातारा में आफातारा में जी आफातारा में जी आफातारा में हामार जिउआ परल बा आफातारा में। आँगन ओसारावा दुआरावा चिराइल बीचहीं से तुलसी के चउरा फाराइल मिलल दरकल देवालि हमरा बाखारा में हामार जिउआ परल बा आफातारा में। बगली में पइसल बा जेठवा महीना कापारा प बइठल बा सहुआ कमीना कुछु रोजहीं टूटत बा हमरा भितरा में। हामार जिउआ परल बा आफातारा में। आरे आईं आईं पंडिजी गोड़ लागतानी बुचिया ले आउ माँजी लोटवा में पानी जाँची भगिया हमार आपना पातरा में हामार जिउआ परल बा आफातारा में। हामार सपना रहे कि राह नया बनाइब डगर- डगर नगर गाँव सुन्दर बनाइब राहि कटलसि बिलाइ बीचहीं जतरा में हामार जिउआ परल बा आफातारा में। - हरेश्वर राय, सतना

मजनूँ के चाचा

मजनूँ के चाचा बुढ़वा जबसे भइल रिटायर बनल बा एक नमर के शाएर घरवा में जियाल्का दुशबार बा फटफट फाटत मोर कापार बा ना। गागल्स पेन्हत बा कापार मोंछिया राखत बा नोकदार खुस्टा अपना रहन से लाचार बा फटफट फाटत मोर कापार बा ना। टुअरा बेर बेर जुल्फी झारे मुअना दिन भर सेल्फी मारे भइल मजनूँ के चाचा बरियार बा फटफट फाटत मोर कापार बा ना। दिनभ फच्चर फच्चर थूके बेर बेर कुक्कुरा नियर भूँके रोज भोरे भोरे करत कुँकुहार बा फटफट फाटत मोर कापार बा ना। - हरेश्वर राय, सतना

फुटानी में

फुटानी में फुटानी में जी फुटानी में गइली हमरी जवानी, फुटानी में। मति उपरजनी ना हरि नाम जपनी माई मेहरिया के नाक कान बेंचनी हेललि- हेललि भँइसिया पानी में। देसवा समजवा के सेवा ना कइनी खेते खरिहानी में कबहूँ ना गइनी लगवनी खाली माजमा दलानी में। बाबूजी कुफुती चिलारी पर गइलन खूँटी पर नाधा आ जोती टंगइलन हाँथ मलत बानी बैठल चुहानी में। - हरेश्वर राय, सतना

सुनु रे भगता

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