हम ना अइबों रे

हम ना अइबों रे

हम ना अइबों सुनु रे भगता हम ना अइबों रे
तोर देश भइल कल्युगी भगता हम ना अइबों रे।

नाहीं गोप गोबरधन कतहूँ ना गोपी ना जमुना
पोले-पोले खाली लुगी भगता हम ना अइबों रे।

लउकत नइखन वृंदावन में एकहूँ गइया बाछा
लउकें सुसुकत सुगा-सुगी भगता हम ना अइबों रे।

मोरपंख मक्खन मिसिरी ना नाहिं कदम के डार
चारु देनिए झुग्गी-झुगी भगता हम ना अइबों रे।

समरसता में रोज लगावत बड़ुए लोगवा आगी
बाजे झूठवा के डुगडुगी भगता हम ना अइबों रे।

- हरेश्वर राय, सतना