गोरी! खोलs केवारी

 बा आइल बसंता दुआरी प, ए गोरी! खोलs केवारी।
उठल बा ताल ठकुरबारी प, ए गोरी! खोलs केवारी।।
नखड़ा देखावsतिया पुरवा बेयरिया
पिअरे पियर भइल दिल के बधरिया
मनs लटू हमार फुलवारी प, ए गोरी! खोलs केवारी।
उठल बा ताल ठकुरबारी प, ए गोरी! खोलs केवारी।।
कलियन से भौंरा करत बा ठिठोली
जिया के छेदतिया कोइलर के बोली
तनि ढरिं ना एह ब्रम्हचारी प, ए गोरी! खोलs केवारी।
उठल बा ताल ठकुरबारी प, ए गोरी! खोलs केवारी।।

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