अलविदा साथियों: हरेश्वर राय

चल रहा हूं अभी अलविदा साथियों
फिर मिलूंगा कभी अलविदा साथियों।

तेरी महफ़िल में मैं था अकेला बहुत
इसलिए जा रहा अलविदा साथियों।

रह चुका मैं बहुत दिन किसी कैद में
अब रिहा हो रहा अलविदा साथियों।

ये जो अंबर खुला है बहुत दूर तक
उड़ने अब चला अलविदा साथियों।

मैंने वादा किया था किसी से कभी
अब निभाने चला अलविदा साथियों।

लोकप्रिय पोस्ट

मुखिया जी: उमेश कुमार राय

BHOJPURI Poems by Hareshwar Roy

मोरी मईया जी

सरभंग सम्प्रदाय : सामान्य परिचय - डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'

डॉ रंजन विकास के फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया - विष्णुदेव तिवारी