जिंदगानी: हरेश्वर राय

बिना निमक के दाल जिंदगानी भइल
बे खड़ग बिना ढाल जिंदगानी भइल।

सझुरावल जाता हेने त होने अझुराता
बड़ मकड़ा के जाल जिंदगानी भइल।

फूल खिले के मौसम खतम हो गइल
बिना हाल के बेहाल जिंदगानी भइल।

खेल अइसन अवारा हवा कर गइल
बिना चोप के पंडाल जिंदगानी भइल।

फाटि गइली बंसुरी आ फूटले मंजीरा
बिना सुर बिना ताल जिंदगानी भइल।

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