जागु रे बबलुआ: हरेश्वर राय

आरे अबहीं ले सुतले बाड़े,
सुनु आ गइल करोना, भागुभागु रे बबलुआ।

एकरा बारे में सुनिके त, फाटत मोर महमंड
बुतल कतने के चिराग, भागुभागु रे बबलुआ।

दारु मुरुगा मछरी के त, तें पंजरा जनि जइहे
खइहे पलकी के साग, भागुभागु रे बबलुआ।

प्रेम मोहबत के फेरा में, तें तनिको मति परिहे
मुंहें डलले रहिहे जाब, भागुभागु रे बबलुआ।

जेबी में तें रखले रहिहे, गोरकी माटी के ढेली
मले खतिरा दूनहूं हाथ, भागुभागु रे बबलुआ।

जवन-जवन कहतानी, तवन-तवन सभ मनिहे
ना त मुइबे फेंकके झाग, भागुभागु रे बबलुआ।
हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

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