जवानी खपि जाई बचवा: हरेश्वर राय

गउवां छोड़ि सहर जनि जइहs, हो जइबs बे पानी
जवानी खपि जाई बचवा।
होखे ऐसन जनि नादानी, जवानी खपि जाई बचवा।

ताल - तलइया सब छूटि जइहें, छूटिहें बाबू माई
बर्हम बाबा के छूटी चउतरा, छूटिहें छोटका भाई
सुसुक सुसुक के रोइबs बबुआ, केहू ना पहिचानी
जवानी खपि जाई बचवा।

गली-गली मीरजाफर ओइजा चौक चौक जयचंद
टूंड़ उठवले बिच्छू मिलिहन, फू - फू करत भुजंग
चउबीस घंटा होई पेराई, होइ जाई कमर कमानी
जवानी खपि जाई बचवा।

बासी बासी सुबह मिली, अरुआइल सांझ उदास
पंख नोचाइल चिरईं बनबs, भुंइ प गिरी आकास
आन्हर गूंग बहिर होइ जइबs, होई खतम कहानी
जवानी खपि जाई बचवा।
हरेश्वर राय 
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश 
शासकीय पी. जी. महाविद्यालय सतना 
सतना मध्य प्रदेश 

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