लहरिया लागे ए राम: हरेश्वर राय

जेठ के महीनवा के मध दुपहरिया, लहरिया लागे ए राम
सनकल बा पछेया बेयरिया, लहरिया लागे ए राम।

सून बंसवरिया आ सून फुलवरिया, लहरिया लागे ए राम
सूनी रे डगरिया बधरिया, लहरिया लागे ए राम।

सूखली तलइया आ मुअली मछरिया, लहरिया लागे ए राम
आहर पोखर में पपरिया, लहरिया लागे ए राम।

फेंड़वा ना रुखवा ना कतहीं छहंरिया, लहरिया लागे ए राम
घरवा बा बेगर केवरिया, लहरिया लागे ए राम।

सावन के असवा प गिरल बजरिया, लहरिया लागे ए राम
पिया जाके फंसले सहरिया, लहरिया लागे ए राम।
हरेश्वर राय 
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश 
शासकीय पी. जी. महाविद्यालय सतना 
सतना मध्य प्रदेश 

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