मन ठूंठ प आस के पात आइल: हरेश्वर राय

 मन ठूंठ प
आस के पात आइल।

जेठ मास के तपन ओराइल
बा सावन ले आइल पुरवाई
अब अगस्त के फूल खिलल
हमरा गोड़न से गइल बेवाई

नवनीत से
नेहाइल रात आइल।

ओठ फाग के गीत भइले स
अंखियां भइली सन अमराई
अब जाके इ समझ में आइल
कि मितवा का ह आखर ढाई

गुलाबन से
भरल परात आइल।
हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

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