हम ना आइब रे: हरेश्वर राय

 हम ना आइब  सुनु रे भगता ! हम ना आइब रे
तोर देस भइल कल्युगी भगता हम ना आइब रे।

नाहीं गोप गोबरधन कतहूं ना  गोपी ना जमुना
खाली पोले- पोले लुगी भगता हम ना आइब रे।

नइखन लउकत वृंदावन में  एकहूं गइया बाछा
लउके रोवत सुगा सुगी भगता हम ना आइब रे।

मोरपंख माखन मिश्री ना नाहिं कदम के डाल
चारु देनिए झुग्गी- झुगी भगता हम ना आइब रे।

सत्य प्रेम के रोज जरावत  बड़ुए लोगवा होली
बाजे झूठवा के डुगडुगी भगता हम ना आइब रे।
हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

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