तिरसंकु के हाल

गूंडा- मवालीन आ लूकड़न के राज बा
लंगवन- बहेंगवन के मुंडी पर ताज बा।

लुच्चन के, टुच्चन के, छतिया उतान बा
एहनी के इचिको ना डर बा ना लाज बा।

बोकड़न- लफंगन के चलती बा देस में
सहजे का एहनी के अपना पर नाज बा।

कुक्कुर के पोंछ अस एहनी के मोंछ बा
अंगुरिन में एहनी के भरल पोखराज बा।

बाटे हलिया हमार त भइल  तिरसंकु के
जमीनिया प‌‌र सरप आ बदरी में बाज बा।

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट

मुखिया जी: उमेश कुमार राय

मोरी मईया जी

जा ए भकचोन्हर: डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'

डॉ. बलभद्र: साहित्य के प्रवीन अध्येता - विष्णुदेव तिवारी

डॉ रंजन विकास के फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया - विष्णुदेव तिवारी