हमार जिंदगानी

हमार जिंदगानी  हमार  जिंदगानी
भइलि पानी पानी हमार जिंदगानी।

लागता कि बीचहीं से जाइब चीराई
अइसन मचल बा हमार खींचातानी।

पाले परल  बानी अइसन  बलम के
माटिया में मिलल बा भरल जवानी।

हम भीड़ियो में हरदम रहीना अकेले
रहि- रहि के  दरदा  उठेला  तूफानी।

नोकरी के रसरी से अइसन छनइनी
कि चउबीस घंटा  दूहल जात बानी।

लोकप्रिय पोस्ट

मुखिया जी: उमेश कुमार राय

मोरी मईया जी

डॉ रंजन विकास के फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया - विष्णुदेव तिवारी

सरभंग सम्प्रदाय : सामान्य परिचय - डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'

डॉ. बलभद्र: साहित्य के प्रवीन अध्येता - विष्णुदेव तिवारी