खोजत बानी: भाग १

 अपना बचपन के गांव रे भईया खोजत बानी।
अपना पुरखन के नांव रे भईया खोजत बानी।।

सांझ सुहानी रएन सलोनी कऊड़ा वाली भोर
फुदगुद्दी  के धूर  नहाई चकवा  चकई  चकोर
करिया कगवा के कांव रे भईया खोजत बानी।

लोरी  कजरी बिरहा झूमर सोहर आ जंतसार
रोपा  कटनी गीतन  के संग झूमत खेत बधार
पीपरा के सीतल छांव रे भईया खोजत बानी।

गुली डंटा  दोल्हा  पाती चिक्का ती ती ती ती
गोली वाली नन्हकी गुब्भी तिरका लाता लुत्ती
दुअरा पर  लट्टू दांव रे भईया  खोजत बानी।

अरवन झगरा नाधा  जोती घारा मारल लऊर
सेंगरी सेंगरा  बहंगी मुंगरा चंउर  ठेंगरी मऊर
जलकोबिया  के नाव रे  भईया खोजत बानी।

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