जहर घोराइल बा।

हर सहर के हावा में, अब जहर घोराइल बा।
हर दर्द के दावा के, अब असर ओराइल बा।।

मासूम के चेहरा पर, बा घाव भइल बड़हन।
फेर भीड़ के हाथन से, निरदोस हताइल बा।।

हर आस के पतई पर, ओलन के मार परल।
हर दिल के डेहरिन में, अरमान तंवाइल बा।।

आचरन के समएना में, बा छेदे- छेद भइल।
साधुन के आवरन में, फेरु चोर धराइल बा।।

बा हाल बुरा नगरन के, चउपट बड़ुए रजवा।
कोइला हीरवा दूनहूं, एके मोल बेंचाइल बा।।

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