सुकरात से स्वप्नवार्ता - डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'



सुकरात यूनान के महान दार्शनिक आ प्रखर प्रभावी वक्ता रहलें। उनका प्लेटो आ जेनोफर जइसन दार्शनिक के गुरु आ अरस्तू जइसन चिंतक-विचारक के दादा गुरु होखे के गौरव प्राप्त रहे। प्राथमिक विद्यालय के हिन्दी के पुस्तक में सुकरात के एगो जीवनी पढ़े के मिलल रहे। जवना के अनुसार सुकरात के जनम यूनान के एथेंस राज्य का एगो सीमावर्ती गाँव में 469 ईसा पूर्व एगो सामान्य परिवार में भइल रहे। उनकर बाबूजी सोफ्रोनिसकस मूर्तिकार रहलें आ माई दाई के काम करत रहली। उनका प्रारंभिक गुरु के नाम क्रीटो रहे। उनका पहिलकी मेहरारू मायरटन से दू बेटा लाम्प्रोकेस आ मेनेक्सेनस उर दूसरकी मेहरारू जैन्थआइप से एगो बेटा सोफ्रोनिसकस रहलें।

सुकरात जीवन एथेंस में बीतल। बचपन में ऊ अपना बाबूजी का काम में हाथ बटावस। सेयान भइला पर उनकर नोकरी सेना में लाग गइल। ऊ पैटीडिया के लड़ाई में वीरतापूर्वक लड़बो कइलें। जवना के चलते उनकर सेनापति उनका से बहुत खुश रहे। कुछ दिन ऊ एथेंस का काउंसिल के सदस्यो रहलें। ऊ जब जहँवा जवना दायित्व में रहलें, उहाँ ईमानदारी आ लगन से अपना दायित्व के निर्वहन कइलें। कबो गलत व्यक्ति, विचार भा बेवस्था के साथ ना दिहलें आउर ना अपना जाने गलत होखे दिहलें। बाकिर उनका के लेके हमरा दिमाग में एगो सवाल बरमहल खटकत रहल कि सुकरात जइसन महान दार्शनिक, चिंतक, वक्ता, मानवतावादी आ सही मायने में प्रभावी आचार्य के यूनान के एथेंस जइसन लोकतांत्रिक राज-बेवस्था मृत्यु दंड काहे दे दिहलस। अक्सर रात में सूते का पहिले कुछ अइसने सवालन से जूझत नींद आ जाला आ ओहू रात आ

गइल। देख रहल बानी जे सामने एगो लामा-चाकर देह, दाढ़ी-मोंछ आ माथ पर उज्जर धप-धप केस वाला बेडौल चेहरा के एगो व्यक्ति खड़ा बा। उनका के कवनो महामानव जान के माथ नवावत पूछनीं- 'अपने के ?' ऊ बतवलें- 'हम सुकरात।' हमहूं खड़ा हो गइनीं आ उनका से बइठे के निहोरा कइनीं। एह पर ऊ कहलें कि 'ना, तूं चलऽ बाहर टहलल जाव। ओही दरम्यान कुछ बतकहियो होत रही।' हम आगे बिना कवनो बतकही के उनका सङे घर से बाहर सड़क पर आ के टहले लगनीं। फेर संवाद के सिलसिला उहे प्रारंभ करत कहलें- 'हमरा के लेके तोहरा मन में कई तरह के सवाल पैदा भइल बा। ओकरे से जुड़ल जानकारी देवे खातिर हम हाजिर बानी।' एह पर हम सकपकात बोलनीं - 'हमार सौभाग्य बा कि राउर दरसन भइल। पहिले रउरे अपना यूनान, एथेंस, उहाँ से जुड़ल जीवनोपयोगी सभ्यता, संस्कृति, दर्शन, विग्यान, कला आदि के बारे में विस्तार से बताईं।'

एह पर बूढ़ सुकरात बोललें- 'एके सङे यूनान, एथेंस आ उहाँ से जुड़ल एह तमाम चीजन के बारे में बतावे में त बहुत समय लागी। खैर, कुछ महत्वपूर्ण बातन के बता सकिले।

यूनान यूरोप के एगो देस ह। इहाँ के लोग यवन कहाला। पच्छिम के भासा अंगरेजी आदि में एकरे के ग्रीक कहल जाला। इहाँ के लोग अपना देस के ' एल्लास ' कहेला। ई भूमध्य सागर के उत्तर पूरब में स्थित द्वीपन के समूह ह। ई द्वीप सब ईसा से लगभग 4000 बरिस पहिले बस गइल रहे। ईसा पूर्व दू हजार बरिस पहिले तक इहाँ ईजिआई सभ्यता रहे। जहाँ का लोग के मिस्र, एशिया माइनर, भारत आदि से सम्बन्ध आसान रहे। ईसा से 1500 बरिस पहिले तक मिनाई प्रभाव में एकियाई जाति ग्रीस का सभ्यता के विकास भइल। माइसीनी, हीरो युग आ होमर युग एही काल के कहल जाला। कहल जाला कि ट्रोजन युद्ध, जवना के कथा लेके होमर आपन विश्व प्रसिद्ध काव्य ' इलियट आ ओडिसी ' लिखले रहलें। बाद में इहाँ के लोग मिस्र, तुर्की आ पच्छिमी यूरोप में जाके बस गइल।

पच्छिम का सभ्यता, संस्कृति, दर्शन, विग्यान, कला, चिकित्सा आदि के उद्गम यूनान भा ग्रीस रहल बा। एशिया आ यूरोप का बीचे होखे के चलते एह दूनो महादेसन से एह द्वीप समूहन के व्यापारिक सम्बन्ध बहुत पहिले से रहल बा। समुद्रन से 115-120 किलोमीटर के आसपास के देस भा द्वीप समूह होखे के चलते बंदरगाह के सुविधा आ व्यापार के सहुलियत दूनो मिल जाए। इहाँ के लोग बढ़िया नाविको होखे। एह यूनान के अइसन भौगोलिक बनावट बा कि एकरा के तीन भाग में बाँटल जाला- उत्तरी यूनान, मध्यवर्ती यूनान आ दक्खिनी यूनान। सउँसे यूनान पर कबो एक राजा के राज नइखे रहल। इहाँ छोट-छोट नगर आ राज्य ( सिटी आ स्टेट ) के विकास भइल। काहे कि सउँसे यूनान अलग-अलग पहाड़ियन से भरल रहे का चलते आवागमन के दिखाईं बहुत कठिनाई वाला रहल बा। एकर कुल्ह नगर-राज्य सब एक-दोसरा से स्वतंत्र रहियो के एक-दोसरा से दुश्मनी राखत लड़त-झगड़त रहल बाड़ें।

एह यूनानी प्रायद्वीप का कुल्ह राज्यन में सबसे महत्वपूर्ण राज्य तीने गो भइल - उत्तर में मकदुनिया (मेसीडोनिया) , बीच में आर्त्तिका आ दक्खिन में लाकोनिया। आर्त्तिका के राजधानी रहे एथेंस, जवन हमार जनम धरती रहे। सांची कहीं त ई एथेंसे यूनान के दार्शनिक, वैज्ञानिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक आदि विकास के उद्गम वाला जगह रहे। जवना के चलते दुनिया में यूनान के नाम भइल। अपना जनता का बौद्धिकता आ स्वतंत्रता के पक्षधर लोकतांत्रिक राज्य एथेंस में एक से बढ़के एक दार्शनिक, चिंतक, चिकित्सक, वैज्ञानिक, साहित्यकार, कलाकार आदि पैदा भइलें। उहँवे पड़ोसी राज्य लाकोनिया के राजधानी स्पार्टा दार्शनिक, वैज्ञानिक, कलाकार आदि का जगे अपना शारीरिक पक्ष, शौर्य, वीर्य आ सैन्य शक्ति के से भरपूर पराक्रमी, योद्धा आ मेहनती जन समूह के लेके चर्चित रहे। स्पार्टा में एथेंस का लोकतंत्र के जगे अधिनायकवादी बेवस्था रहे। उहाँ के जनता स्वतंत्र ना होके शासन-शासक का नियंत्रण में रहे वाला रहे।

छउवीं सदी ईसा पूर्व से चउथी सदी ईसा पूर्व के बीच का काल खंड में यूनान के सभ्यता, संस्कृति, कला, दर्शन, साहित्य, विग्यान आदि के विकास एथेंस का विकास से जानल गइल। पांचवी सदी ईसा पूर्व कई तरह के विघ्न-बाधा सब के बादो एथेंस अजब विकास कइलस। 490-480 ईसा पूर्व के बीच ईरान दू-दू बेर यूनान पर चढ़ाई कइलस। बाकिर दूनो बेर हारल। 480 ईसा पूर्व माराथोन का मैदान में भइल युद्ध में त ऊ अइसन हारल कि फेर दोबारा चढ़ाई करेके हिम्मत ना जुटा पवलस। चउथी सदी ईसा पूर्व में त मकदुनिया के सम्राट सिकन्दर ईराने के हराके यूनान साम्राज्य में मिला लिहलस। बाकिर जीत के बावजूद यूनान का जन- धन के अलावे बौद्धिक क्रिया-कलापन के बहुते क्षति भइल।'

एह पर हम विनयी भाव से टोकत बोलनीं - '

मकदुनिया (मेसीडोनिया) उहे नू जवन उत्तरी यूनान में पड़ेला आ रउरा एथेंस के पड़ोसी राज्य ह। जहाँ के सम्राट 359 ईसा पूर्व फिलिप द्वितीय रहस। जे यूनान का कई राज्यन के जीत लेले रहस आ कोरिंथ आ थीबीज सैनिक अड्डा बन गइल रहे। जिनका हत्या के बाद उनकर बेटा 335 ईसा पूर्व सिकन्दर सम्राट बनल आ बिखड़ल ग्रीस के एगो झंडा के नीचे कइलस। ऊ यूनान विजय के बाद फारस साम्राज्य का ओर बढ़ल। 300 ईसा पूर्व आधुनिक तुर्की के तट पर पहुंचल आ उहाँ का फारस के शाह दारा तृतीय के हरवलस। जवन तीन बेर फारस का सेना के हरा के मिस्र के ओर बढ़ल आ फेर लौट के ईरान (मेसोपोटामिया) जवन फारस के कब्जा में रहे, ओकरा के जीतत अपना से चालीस गुना बड़ साम्राज्यन के हरावत अफगानिस्तान होत पच्छिमी भारत के राजा परम शक्तिशाली पोरस से घनघोर लड़ाई लड़ल। लड़ाई में हार के बावजूद पोरस के अपने कुछ लोग सिकन्दर से मिलके छल पूर्वक सिकन्दर से मिले के बहाने पकड़वा दिहलस। बाकिर ओह घनघोर युद्ध में सिकन्दर आ ओकरा सेना के हिम्मत पस्त हो गइल रहे आ ऊ सब ओगे बढ़े आ लड़े से इंकार कर देले रहे। तब बहुत क्षति उठा चुकल अपना हतोत्साहित सेना के पस्त हिम्मत देख के सिकन्दर अपना के विश्व विजेता बनावे का सपना के ओही जा विराम देके वापस लौट गइल रहे। जवना के मृत्यु 323 ईसा पूर्व बेबीलोनिया में हो गइल रहे। सिकन्दर का मृत्यु के बाद फारस साम्राज्य जवन ओकरा कब्जा में आ गइल रहे, ओकरा के ओकर सेनापति सब आपुस में बाँट लेले रहे। आधुनिक अफगानिस्तान में केन्द्रीय शासक सेल्युकस एह में सबसे शक्तिशाली रहे। जवन अपना बेटी हेलेना के चन्द्रगुप्त मौर्य के देके वैवाहिक संधि के बहाने जान बचा के भागल रहे।'

हमार बात सुनके मुस्कात सुकरात बोललें - 'अबहीं एथेंस से जुड़ल पहिले कुछ आउर बहुत महत्वपूर्ण तथ्य जाने के बा जवना से हमरा बारे में जाने में सहुलियत होई। फेर ऊ कहे लगलें - '460 ईसा पूर्व से 430 ईसा पूर्व तक लगातार तीस बरिस तक एथेंस में परिक्लेस (500 ईसा पूर्व-429 ईसा पूर्व) के शासन रहे। परिक्लेस जइसन सुयोग्य शासक का शासन काल में एथेंस के बौद्धिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, आर्थिक, राजनीतिक आदि हर क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास भइल। ई काल एथेंस का इतिहास के सोनहुला काल रहे। एथेंस में एस्खिलुस जइसन नाटककार, पिंदार जइसन प्रगीतकार, हेरादोतुस जइसन इतिहासकार, हिपोक्राटेस जइसन चिकित्सक आदि ओही परिक्लेस युग के देन रहलें। ऊ हर क्षेत्र के प्रतिभाशाली आ प्रभावी विद्वान-विचारक के मान सम्मान देस आ सभका सहयोग आ सुझाव से राज्य कुशल नेतृत्व करस। जवना राज्य के शासक का आ ओकरा मंत्री का अपना देस के नागरिक के बारे में ई जानकारी होला कि कवन आदमी कवना काम के जोग बा। तब ऊ ओह आदमी के ओकरा योग्यता के लायक काम देके देस सेवा में जोड़ देला। काहेकि ईश्वर केहू के बेकामिल बना के ना भेजस। पेरिक्लेस एह दिसाईं बहुते सफल शासक सिद्ध भइलें।'

सुकरात के विचार सुनके हमरा संस्कृत के एगो अस्लोक इयाद पड़ गइल आ हम बोलनीं - 'हमरो इहाँ संस्कृत में कहल गइल -

' अमंत्रमक्षरं नास्ति नास्ति मूलं वनौषधम्।
अयोग्यो पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभ:।।'

मतलब, कवनो अइसन अक्षर नइखे जवन मंत्र ना हो सके, कवनो अइसन वन नइखे जवन औषधि के ना होखे, कवनो अइसन मनुष्य नइखे जे योग्य ना होखे। संसार में एह सबका योग्यता के पहचान के सही काम आ दिसा में जोड़े वाला के कमी बा।'

हमार बात सुनके के सुकरात का मुँह से निकलल- 'वाह! अद्भुत। 'एकरा बाद ऊ आगे बतवलें - शासक पेरिक्लेस हमरा के बहुत मानस। कवनो मुद्दा पर असहमति भइला पर ओकर कारन जाने आ ओकरा पर संवाद करके हल निकाले के प्रयास करस। लोकतांत्रिक मूल्यन के आदर देत सही दिसा में काम करे खातिर शासन तंत्र के प्रेरित करस। बाकिर 430 ईसा पूर्व आवत-आवत परिक्लेस उम्र का हिसाब से बूढ़ आ कमजोर हो गइल रहलें। उनकर प्रतिद्वंद्वी उनका खिलाफ तरह तरह के साजिश करत रहस। दुर्योग से पेरिक्लेस के शासन काल समाप्त होखे का एक साल पहिले 431 ईसा पूर्व पराक्रमी, शौर्य आ सैन्य शक्ति सम्पन्न स्पार्टा बौद्धिक विकास का चरम शिखर पर पहुँचल एथेंस पर आक्रमण कर दिहलस। स्पार्टा के हर तरह से बलशाली भइला के बावजूद हमार बौद्धिक सम्पन्न लोकतांत्रिक देस एथेंस 27 बरिस तक लड़त रहल। एही बीच 429 ईसा पूर्व परिक्लेस के उत्तराधिकारी के रूप में महामूर्ख, अहंकारी क्लीयोन गद्दी सम्हरलस। ऊ बहुत कान के कच्चा आ कपटी व्यक्ति रहे। एकरा बावजूद एथेंस के कुल्ह शासन तंत्र परिक्लेस के बाद ओकरा नेतृत्व में पूरे छब्बीस बरिस तक लड़ाई लड़त रहल। एह पेलोपोन्नेसिया के युद्ध में एथेंस 27 साल डटल रहल। बाकिर स्पार्टा के सैन्य शक्ति आ शौर्य-पराक्रम के आगे 404 ईसा पूर्व एथेंस अइसन हारल कि पूरा तरह से टूट गइल। एकरा बावजूद ओकर बौद्धिक, सांस्कृतिक आ दार्शनिक उपलब्धि अपना ऊँचाई पर जस के तस बनल रहल आ धीरे धीरे संसार का कालजयी संस्कृतियन के अंग बन गइल।

एह संकट आ दुर्दिन के दौर में क्लीयोन जइसन अहंकारी, कपटी, धूर्त, डाही प्रवृत्ति वाला अयोग्य शासक के मिलला से ओकरा इर्द-गिर्द चापलूस लोगन के जमावड़ा बढ़े लागल। ऊ सब कान के कच्चा क्लीयोन के देस भक्त बौद्धिक जन के खिलाफ कान भरे लागल। धीरे-धीरे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होखे लागल। कहे भर के लोकतंत्र नजर आवे लागल। क्लीयोन जइसन मूर्ख अहंकारी शासक अपने आप के भगवान समुझे लागल। फेर हम एह विचार आ बेवस्था के देस आ समस्त मानव जाति खातिर खतरनाक मान के एकरा खिलाफ देस का नवयुवकन के प्रेरित कइल प्रारंभ कइनीं। ई बात सोरह आना सही बा कि जब कवनो अयोग्य, अहंकारी, धूर्त, कपटी आ डाही प्रवृत्ति के व्यक्ति शासन सत्ता भा कवनो छोट-बड़ आधिकारिक पद पर आसीन होला त एक त ओकरा केहू पर जल्दी विस्वास ना होखे। दोसरे ऊ अपना इर्द-गिर्द अपना से योग्य व्यक्ति के पसन्द ना करे आ तीसरे कुल्ह लोग के कवनो ना कवनो तरीका से तंग करत रहेला। एह से ऊ हमरा अइसन आदमी का पीछे हाथ धोके पड़ गइल आ हमहूं देस आ मानव मात्र के हित में आपन सक्रियता बढ़ा देनीं।'

अइसहूं जब हम बच्चा रहीं त हमार बाबूजी हमरा भीतर पढ़े आ बहुत कुछ जाने-सीखे के ललक देख के हमरा के पड़ोस के शिक्षक क्रीटो के लगे पढ़े खातिर भेजनीं। तबे से हम हर व्यक्ति, शिक्षक आदि से तरह-तरह प्रश्न कइल करीं। हमार सवाल ढोंगी विद्वानन के फेरा में डाल देवे। बतकही सुन के संघतिया सब आउर प्रेरित करे लोग। हमरा सेयान भइला के बादो हमार ई अभियान जारी रहल। हमरा सवालन के मुख्य विषय रहत रहे - ईश्वर, सृष्टि, धर्म, राजा, राजधर्म, प्रजाधर्म, प्रशासन आदि। लोग बात करे से कतराए। एक ईश्वर के मानेवाला हम नाना प्रकार के देवी-देवता का पूजा पाठ में विस्वास ना करीं। देस भक्ति आ देस सेवा खातिर सबके प्रेरित करीं। हमार ई विचार अटल बा कि देस व्यक्ति आ राजा से बढ़के होला। राजा प्रशासक ह ईश्वर ना ह। ऊ तबहीं तक अच्छा बा जब तक देस का जनता के ईमानदारी से सेवा करऽता।'

हम आगे बात बढ़ावत कहनीं कि जहाँ तक हमरा जानकारी बा जे 'रउरा के सउँसे यूरोप आचार शास्त्र में उपयोगितावाद के संस्थापक मानेला। रउरा धइल-धराऊं अनुपयोगी रहन-सहन, आचार-विचार आ तौर-तरीका के विरोधी रहीं। रूढ़िवादी आ परम्परा का रूप के अप्रासंगिक चीजन के अपनावे-ढोये वाला लोग रउरा से चिढ़त रहे। बुद्धि आ तर्क के अलावे कवनो बाहरी सत्ता के आदेश माने के रउरा पक्षधर ना रहीं। रउरा विचार में भावना खातिर कवनो खास जगह ना रहे। रउरा आत्मदीपो भव के प्रचारक रहीं। राउर साफ-साफ मत रहे कि जरूरी नइखे कि केहू उमिर में बड़ बा त ऊ सब बात सहिए कहऽता आ ओकर सब बात मानले जाए। रउरा नवकी पीढ़ी के हमेसा प्रेरित करत रहीं कि बिना परिणाम के चिंता कइले आ बगैर परिवार-परिवेश के फिकिर कइले एकनिष्ठ भाव से ग्यान आ सत्य के अनुसंधान करत रहे के बा। एकरा में कवनो समझौता आ गिरावट के बात ना होखे। रउरा अनुसार शिव मतलब कल्याणकारी उहे बा जवन उपयोगी बा। रउरा सत्ता विषयक अवज्ञा का सीमा में आदमिए ना देवतो आवत रहलें। धर्म आदि जवन कुछ तर्क का कसउटी पर खरा ना उतरे ऊ रउरा नजर में मान्य ना रहे। ईश्वर में आस्था के बावजूद ईश्वरीय विधि विधान के बारे में राउर नजरिया अज्ञेयवादी रहे। जीवन भर लोकतांत्रिक आजादी के उपभोग करे का बादो रउरा लोकतंत्र का कमी आ कमजोरी के आलोचना करे से हिचकत ना रहीं।'

अपना विचार, सिद्धांत आ दर्शन के बारे में हमरा मुँह से ई कुल्ह बात सुनके सुकरात हठात् बोललें - 'बिल्कुल, ई सब कुछ सही बा। हम सही ग्यान के जरिए जनता के जीवन स्तर सुधारे खातिर आजीवन लागल रहनीं। हम धर्म का संस्थागत रूप के जगे सैद्धांतिक पक्ष के माने पर जोर दिहीं। सही आ उपयोगी ग्यान त सभका खातिर संभव होला, बशर्ते ओकरा खातिर ठोस आ ठीक ढ़ंग से प्रयत्न होखे के चाहीं। कवनो विचार, सिद्धांत भा दर्शन के कई बार आ कई तरह से परखला के बादे ओकरा सच्चाई तक पहुँचल जा सकेला। एह संसार में ग्यान से पवित्र चीज दोसर कुछऊ ना हो सके। एह संसार में सबसे बड़ अग्यानी ऊ ह जेकरा अपना अग्यानपन के बोध नइखे। सबसे बड़ ग्यानी उहे ह जेकरा अपना अग्यानपन के भान बा आ ओकरा के दूर करे खातिर प्रयासरत बा। एह देह के नास हो जाई। आत्मा अमर बा। एह से आत्मा के सब गुन से सम्पन्न बनावे के चाहीं। बुद्धि सबसे बड़ सद्गुन ह। बुद्धिमान आदमी हर परिस्थिति में संतुलित रहेला। बुद्धिमान अपने ना अनको अनुभव से लाभ उठा लेवेला आ मूर्ख अपनो अनुभव से लाभ ना उठावे।सुशिक्षित व्यक्ति उचित-अनुचित के विचार कर सकेला।'

हम उनका से पूछनीं कि रउरा आपन गुरु केकरा के मानेनीं। एह पर कहलें कि 'हम आपन गुरु मूर्ख लोग के बनवनीं। हम मूर्ख लोग पर अक्सर विचार करत रहनीं कि आखिर दुनिया एह लोग के मूर्ख काहे मानेला भा बनावेला। मूर्ख लोग का ओह कमी के अपना अन्दर खोजत रहल बानी। कुछऊ कमजोरी नजर अइला पर ओकरा के दूर करत रहल बानी।'

सुकरात आगे बोलत गइलन - 'एह दुनिया में हर चीज के दू गो पहलू होला। जे नीमन भा गुन देखे के चाहेला ओकरा नीमने आ खाली गुने देखाई देवेला। बाकिर जेकरा बाउर भा अवगुन देखे के आदत बा ऊ अच्छाइयो का बीच से बाउर भा अवगुन के निकाल लेवेला। फरक खाली नजरिया के होला। जइसे केहू का चन्द्रमा भा दीआ से फइलत अँजोर देखाई देवेला त उहँवे केहू के नजर चन्द्रमा के दाग आ दीआ का नीचे के अंधकारे पर होला।'

हम उनका से एगो सवाल कइनीं कि 'रउरा कवनो ग्रंथ काहे ना लिखनीं ?' एह पर ऊ बेबाकी से जबाब दिहलें कि ' एक त हम हवा-हवाई बात कहे आ सुने के तरजीह ना देनीं। आपन मौलिक शिक्षा अपना आचरन से उपदेश के रूप में दिहनीं। अपना निजी परिवार के चिंता ना करके जीवन भर एथेंस का नौजवानन के शिक्षित करे आ सुधारे में लगा दिहनीं। अपना पत्नी आ परिवार का अपेक्षा के अनुरूप ध्यान ना दे पावे का चलते पत्नी आ परिवार का कोप के भाजन बने के पड़त रहे। बाकिर हमरा खातिर त सउँसे एथेंस परिवार रहे। हम खूब सुबह घर से निकल जाईं आ एथेंस का सड़क पर भा बीच चौराहा पर नौजवानन के बीच संवाद के माध्यम से आपन विचार व्यक्त करत रहीं। ग्रंथ लिखे के अवकाश कहाँ रहे। समाज आ देस का हित में कम से कम समय में उपयोगी विचार के प्रसार खातिर सम्पर्क-संवाद से अधिका प्रभावी दोसर कवनो माध्यम ना हो सके। सवाल-जबाब का तरीका से राखल बात अधिका असरदार होला। एकरा में अध्यापक आ अध्येता दूनो सहभागी होलें। हम एह शैली के प्रभाव देखले बानी। हम एही संवाद आ सवाल-जबाब का जरिए अपना शिष्यन के भीतर मातृभासा प्रेम, यूनानी कवितन के व्याख्या, गणित, ज्यामिति आ खगोल विज्ञान के बारे में भी विमर्श कर लेत रहीं। एकरे माध्यम से हम एथेंस का जवानन के बीच बौद्धिक साहस आ बौद्धिक आजादी के भरपूर भावना भरले बानी। व्यक्ति, समाज आ शासन तंत्र के देखावटी-बनावटी ढ़कोसला, आडम्बर, रूढ़िवादी अनुपयोगी सोच, राजनेतन के दूरंगी नीति आ आचरन के आलोचना के असर धीरे-धीरे नवकी पीढ़ी पर करे लागल रहे। जवन अकर्मण्य यथास्थितिवादी रूढ़िवादी विचारक आ निरंकुश सत्ता के सहायक बुद्धिजीवियन के ग्राह्य ना रहे। नवही पीढ़ी के साथ बढ़त संवाद से रूढ़िवादी समाज आ सरकार का अपना बनल-बनावल संघटन पर खतरा महसूस होखे लागल।'

एह पर हम उनका से पूछनीं - 'त का एही वजह से रउरा पर तीन गो आरोप - ईश्वर के ना माने मतलब नास्तिक होखे, राष्ट्रीय देवता के जगे कल्पित विचित्र अति लौकिक जीवन देवता के प्रतिष्ठित करे आ राज्य के नवही वर्ग के वैचारिक आ बौद्धिक स्तर पर भ्रष्ट बनावे आ शासन बेवस्था के खिलाफ भड़कावे के आरोप लगावल गइल रहे?

हमरा एह सवाल के सुनके ऊ गम्भीर होके जबाब दिहलें - 'बिल्कुल। एह तीनो आरोप के लेके हमरा पर मुकदमा चलल। समाज आ सरकार के ओर से वकील राखे के प्रस्ताव दिहल गइल। तब हम इंकार करत साफ-साफ बोलनीं कि एगो व्यावसायिक वकील अदालत में पुरुषत्व के व्यक्त ना कर सके। हमरा पास जवन कुछ रहे ऊ सब एथेंस के नागरिक का सेवा में लगा दिहनीं। हमरा एह जीवन के उद्देश्य अपना नागरिक के सुखी, शिक्षित, सुसंस्कृत, मर्यादित आ वैचारिक स्तर पर साहसिक आ स्वतंत्र बनावल बा। ओकरा भीतर वास्तविक लोकतांत्रिक जीवन मूल्य के प्रति कर्तव्य भावना भरल बा। अपना के शासन सत्ता में बनाके राखे का उद्देश्य से राजनेतन के द्वारा तरह-तरह के लोभ-लालच आ आश्वासन दे-देखा के काहिल-जाहिल बनावे का साजिश से जनता के सावधान कइल बा। ई काम हम परमात्मा के आदेश से अपना कर्तव्य के रूप में कइले बानी। परमात्मा का एह काम के अपना निजी काम से अधिक महत्व देले बानी। जदि रउरा सभे हमरा के एह शर्त पर छोड़ब कि हम सत्य के खोज छोड़ दीं त रउरा सभे के धन्यवाद कहत हम इहे कहब कि हम परमात्मा का ओह आदेश के पालन करत अपना कार्य के अंतिम सांस ले ना छोड़ सकीं। रउरा सभे त सत्य के खोज आ आत्मा के उत्तम बनावे का प्रयास के बदले सम्पत्ति आ झूठ सम्मान के ओर अधिका ध्यान दिहिले। रउरा सभे का अपना एह कुकृत्य के ना त भान बा आ ना लाज बा। हमार ई संबोधन न्यायाधीश लोग का नागवार गुजरल। 501 न्यायाधीशन में से 280 न्यायाधीश हमरा खिलाफ रहलें जे हमरा के एक महिना बाद जेल में जहर के प्याला पिलाके मृत्यु देवे के सजा सुनवलें। हम एक महिना कैद में रहनीं आ जेलों में कैदी सबके बीच आपन संवाद जारी रखनीं।

जेल के जेलर, प्लेटो, जेनोफर सहित कई गो शिष्य सब, बेटा क्रीटो आदि सभे जेल से भाग जाए के सलाह दिहलें। बाकिर हमार आत्मा एकरा खातिर तइयार ना भइल। हम सबके समुझावत कहनीं कि ई देह नाशवान बा आ आत्मा अमर। एह आत्मा के केहू कुछ ना बिगाड़ सके। एह नाशवान देह खातिर भागल उचित ना होई। हम कवनो अपराध नइखीं कइले। अपराध अग्यानी लोग का बुझाता। जेल से भागल अपराध होई। ई दुनिया कबो एक विचार भा सिद्धांत का परिधि में ना बन्हा सके। मानव मस्तिष्क के एगो सीमा बा। दुनिया के जाने-समुझे खातिर अन्दर के संकुचित विचार आ अंधकार हटावे के चाहीं। मनुष्य ई देह भर ना ह एकरा में सजग आ चेतन आत्मा निवास करेला। एह से हम सबका आत्मा अनुसंधान के ओर बढ़े के चाहीं। हम सब खातिर अपना जीवन में सत्य, न्याय आ ईमानदारी के अवलंबन करेके चाहीं।'

'मृत्यु का पहिले राउर कवन जरूरी काम छूट गइल रहे?' हमरा एह सवाल पर ऊ बतवलें कि 'हम एस्क्रूबस से एगो मुर्गा उधार लेले रहीं। ओही कर्ज के चुकावे के निहोरा अपना बेटा क्रीटो से कइनीं। मृत्यु के आखिरी छन तक हमार कैदियन के बीच यथावत संवाद जारी रहल। नौजवान सब हमार विचारोत्तेजक बात ध्यान से सुनत रहलें। जहिया जहर के प्याला पीये खातिर सामने रखाइल ओह दिन एथेंस में धार्मिक उत्सव मनावल जात रहे। जहर के प्याला पीये खातिर उठावते हमार पत्नी जैन्थआइप, बेटा क्रीटो, शिष्य प्लेटो आदि फूट फूट के रोवे लगलें। हम सबके प्रेम से समझावत जहर के प्याला इत्मिनान से पीअत आपन संवाद जारी रखीं। धीरे-धीरे हमार देह आ दिमाग शांत आ शिथिल होत चल गइल। तब हमार उमिर एकहत्तर साल के रहे। ई घटना 399 ईसा पूर्व के ह।
सम्प्रति:
डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'
प्रताप भवन, महाराणा प्रताप नगर,
मार्ग सं- 1(सी), भिखनपुरा,
मुजफ्फरपुर (बिहार)
पिन कोड - 842001

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