हम विक्रम साराभाई- डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'




एगो पार्क में एगो नौजवान टाइट शूट-बूट में टहलत रहे। टहले के दरम्यान ओकर नजर बगल के बेंच पर बइठल एगो बुजुर्ग पर पड़ल। ऊ कवनो पुस्तक बहुत तल्लीन होके पढ़त रहलें। ऊ नौजवान ओह बुजुर्ग के लगे आके बेंच पर बइठ गइल। फेर ओह बुजुर्ग से पुछलस - अपने का पढ़ रहल बानी ?

बुजुर्ग पढ़े में तल्लीन रहते जबाब दिहलें - 'श्रीमद्भगवद्गीता'। एह पर ऊ नौजवान लमहर - चाकर भासन देत कहलस - 'अपने सब ना सुधरब। दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गइल आ रउरा सभे देस के आजुओ कूप मंडूप बनाके रखले बानी। एह बैग्यानिक जुग में गीता आ महाभारत पढ़ला से देस आगे थोड़े जा पाई।'

एह पर ऊ बुजुर्ग ओह नौजवान से पूछलें - 'तूं का करेलऽ?'

एह पर गुमान से बोललन- 'हम, हम विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के साइंस्टिस्ट हईं, आ रउरा?'

नौजवान के जबाब आ सवाल सुनके ऊ बुजुर्ग उहाँ से उठ के चलते- चलते बोललें - 'हम, विक्रम साराभाई।'
सम्प्रति:

डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'
प्रताप भवन, महाराणा प्रताप नगर,
मार्ग सं- 1(सी), भिखनपुरा,
मुजफ्फरपुर (बिहार)
पिन कोड - 842001



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