बेटी बिदाई के गीत - प्रो.(डॉ.) जयकान्त सिंह 'जय'

राम जानकी ना लेके हमर जान जालें हो
कइके जनक नगरिया वीरान जालें हो।।
माता सुनैना के सूखे नाहिं नैना
बाबा जनक के ना उचरेला बैना
लेके सखियन का गीतियन के तान जालें हो।।
सिया मोर धिया जब इहाँ प्रगटइली
उनहल मेघ माई धरती जुड़इली
लेके कृषि - संस्कृति के ई परान जालें हो।।
गुमसुम अँगनवा के सब गवरइया
खुँटवा प दुअरा पछाड़ मारे गइया
देके बैलन के आँखि हलकान जालें हो।। />सिपुली मउनिया आ छुटली सहेलिया
छूटे फुलवरिया के बेलिया - चमेलिया
झाँकत बाबा के पोखरिया के चान जालें हो।।
भूल-चूक होखे कबो नेह से सिखाएब
कुल परिवार वाला रीतिया बताएब
लेके बिरना के पुतरी परान जालें हो।।
दुअरा प बाबा के के पनिया ले जाई
कूदी कूदी माई के के टहल बजाई
लेके अँगना के हँसी मुस्कान जालें हो।।
अति मनोहारी छवि परम पुनीता
सुजसी सुमंगली सगुनिया सुनीता
कइके नइहर नगर सुनसान जालें हो।।
मिसिरी से मीठ राजा दसरथ के बोली
बेटी बनके सिया जाली चढ़ि आज डोली
लेके राम आपन मान - पहचान जालें हो।
सम्प्रति:
डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'
प्रताप भवन, महाराणा प्रताप नगर,
मार्ग सं- 1(सी), भिखनपुरा,
मुजफ्फरपुर (बिहार)
पिन कोड - 842001

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