मजनूँ के चाचा

मजनूँ के चाचा
बुढ़वा जबसे भइल रिटायर
बनल बा एक नमर के शाएर
घरवा में जियाल्का दुशबार बा
फटफट फाटत मोर कापार बा ना।

गागल्स पेन्हत बा कापार
मोंछिया राखत बा नोकदार
खुस्टा अपना रहन से लाचार बा
फटफट फाटत मोर कापार बा ना।

टुअरा बेर बेर जुल्फी झारे
मुअना दिन भर सेल्फी मारे
भइल मजनूँ के चाचा बरियार बा
फटफट फाटत मोर कापार बा ना।

दिनभ फच्चर फच्चर थूके
बेर बेर कुक्कुरा नियर भूँके
रोज भोरे भोरे करत कुँकुहार बा
फटफट फाटत मोर कापार बा ना।
- हरेश्वर राय, सतना

लोकप्रिय पोस्ट

मुखिया जी: उमेश कुमार राय

BHOJPURI Poems by Hareshwar Roy

मोरी मईया जी

सरभंग सम्प्रदाय : सामान्य परिचय - डॉ. जयकान्त सिंह 'जय'

डॉ रंजन विकास के फेर ना भेंटाई ऊ पचरुखिया - विष्णुदेव तिवारी