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चलुचलु रे मनवां गांव: हरेश्वर राय

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चलुचलु रे मनवां गांव कि तनिका घूमि आईं कउआ ममवा के कांव रे तनिका सुनि आईं। निर्मोही के एह नगरी में पियरइली सन आंख गिद्धराज जटायु लेखा कटल गिरल बा पांख अब बूढ़ - बुजुर्गन के तनिका सुन गुनि आईं चलुचलु रे मनवां गांव कि तनिका घूमि आई। ओद पुअरसी लेखा तनवां गते- गते जरत बा गते- गते नोनी जइसन मनवां हमार झरत बा होखनीं हम जोर एकहरा तनिक दूगुनि आईं चलुचलु रे मनवां गांव कि तनिका घूमि आईं। प्यार मुहब्बत इहां ना बाटे माहुर बोकरे नल का जाने कइसन बा आपन आवे वाला कल त दादी अम्मा के पांव  त तनिका चूमि आईं चलुचलु रे मनवां गांव कि तनिका घूमि आईं। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

काहे मारेल मुसुकिया: हरेश्वर राय

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काहे मारेलs मुसुकिया तू ऐसन जनमार कि कइलs हियरा में हमरा दरारे - दरार। मिलबs त तोहके बताइब हम संघतिया कि बच्चू सचहूं के हईं हमहूं तिरहुतिया तहरा मुसुकी मिसाइल से होई तकरार। जवन वादा भइल बा तूं जनि भूल जइह कबो दोसरा के देखके तूं जनि मुसुकइह तहरा मुसुकी प बाटे हमार एकाधिकार। जदि बतिया ना मनबs ए बचवा हरेसर त दिहबs छोड़ाइ तहार बनल परफेसर दिलफेंक बनल छूटी तहार एही एतवार। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

इयार कहेली: हरेश्वर राय

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प्यार से हमके धनियां इयार कहेली आ चोन्हाली त बुढ़उ हमार कहेली। कबो कबो जब उ खिसिया जाली त त उ हमके मीआदी बोखार कहेली। जेब में जब रुपुलिया ना एकहू मिले मुंह चुनिया के रानी भिखार कहेली। चीर के दिल देखवनी कइक बेर हम एक नमरिया उ तबहूं लबार कहेली। जब कबो काल हम रिसिया जाइला पुच्चुकारेली गोरेया डीहवार कहेली। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

भोजपुरी: हरेश्वर राय

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हमार सान ह, हमार पहचान ह भोजपुरी हमार मतारी ह, हमार जान ह भोजपुरी। इहे ह खेत, इहे खरिहान ह इहे ह सोखा, इहे सिवान ह हमार सुरुज, हमार चान ह भोजपुरी। बचपन बुढ़ापा ह, इहे जवानी अगिया भी इहे ह, इहे ह पानी हमार सांझ, हमार बिहान ह भोजपुरी। ओढ़िला इहे, आ इहे बिछाइला कूटिला इहे, आ इहे पिसाइला हमार चाउर, हमार पिसान ह भोजपुरी। धरनिया ह इहे, इहे ह छान्ही हमरा पसीना के ह इ कहानी हमार तीर ह, हमार कमान ह भोजपुरी। इहे ह कजरी, इहे ह फाग इहे कबीरा ह, इहे ह घाघ हमार धरम ह, हमार ईमान ह भोजपुरी। हरेश्वर राय  प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश  शासकीय पी. जी. महाविद्यालय सतना  सतना मध्य प्रदेश 

लहरिया लागे ए राम: हरेश्वर राय

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जेठ के महीनवा के मध दुपहरिया, लहरिया लागे ए राम सनकल बा पछेया बेयरिया, लहरिया लागे ए राम। सून बंसवरिया आ सून फुलवरिया, लहरिया लागे ए राम सूनी रे डगरिया बधरिया, लहरिया लागे ए राम। सूखली तलइया आ मुअली मछरिया, लहरिया लागे ए राम आहर पोखर में पपरिया, लहरिया लागे ए राम। फेंड़वा ना रुखवा ना कतहीं छहंरिया, लहरिया लागे ए राम घरवा बा बेगर केवरिया, लहरिया लागे ए राम। सावन के असवा प गिरल बजरिया, लहरिया लागे ए राम पिया जाके फंसले सहरिया, लहरिया लागे ए राम। हरेश्वर राय  प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश  शासकीय पी. जी. महाविद्यालय सतना  सतना मध्य प्रदेश 

जवानी खपि जाई बचवा: हरेश्वर राय

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गउवां छोड़ि सहर जनि जइहs, हो जइबs बे पानी जवानी खपि जाई बचवा। होखे ऐसन जनि नादानी, जवानी खपि जाई बचवा। ताल - तलइया सब छूटि जइहें, छूटिहें बाबू माई बर्हम बाबा के छूटी चउतरा, छूटिहें छोटका भाई सुसुक सुसुक के रोइबs बबुआ, केहू ना पहिचानी जवानी खपि जाई बचवा। गली-गली मीरजाफर ओइजा चौक चौक जयचंद टूंड़ उठवले बिच्छू मिलिहन, फू - फू करत भुजंग चउबीस घंटा होई पेराई, होइ जाई कमर कमानी जवानी खपि जाई बचवा। बासी बासी सुबह मिली, अरुआइल सांझ उदास पंख नोचाइल चिरईं बनबs, भुंइ प गिरी आकास आन्हर गूंग बहिर होइ जइबs, होई खतम कहानी जवानी खपि जाई बचवा। हरेश्वर राय  प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश  शासकीय पी. जी. महाविद्यालय सतना  सतना मध्य प्रदेश 

कजरी: हरेश्वर राय

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हरि हरि बाबा के लगावल फुलवरिया चलीं जा उजारे ए हरि। ओही फुलवरिया में चम्पा चमेली सुंदर आरे रामा कठिया लगाके चलीं बारे चलीं जा उजारे ए हरि। ओही फुलवरिया में तितली फतिंगी उड़ें आरे रामा चलीं जा पंखिया कबारे चलीं जा उजारे ए हरि। ओही फुलवरिया में सावन के झूला रामा आरे रामा चलीं जा ओके तुरे- तारे चलीं जा उजारे ए हरि। ओही फुलवरिया में बाबा के आत्मा रामा आरे रामा चलीं जा ओहके अखाड़े चलीं जा उजारे ए हरि। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.