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ई किरिया ह: उमेश कुमार राय

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आखिर ई त हउए किरिया। का इहे हउए राउर किरिया ? संसद के ना कबो चले दिहल विकास के संउसे फंड खईलs तबो कबो ना डेकार लिहलs कहाँ गईल संविधान किरिया आखिर ई त हउए किरिया। नयका अपराध के ढंग बनवलs बचे खातिर हर उपाय सजवलs छल - परपंच से बेगुनाह बनलs कहाँ गईल गीता-कुरान के किरिया आखिर ई त हउए किरिया। घूस से आपन घर - बार बनल क्रप्शन से आपन परिवार सजल ईनसाफ के मजाक खूबे उड़ल कहाँ गईल वर्दी आ फर्ज के किरिया आखिर ई त हउए किरिया। जब जीव सांसत में पड़ जाई सग्गी भी मुंहवा फेर जाई हर बचाव के उपइया टर जाई ईमान-धरम जब तरजुई चढ़ जाई तब जी-डाठी दे खाईला किरिया आखिर ई त हउए किरिया। उमेश कुमार राय ग्राम+पोस्ट- जमुआँव थाना- पिरो जिला- भोजपुर, आरा (बिहार)

हमके ना बुझाइल: हरेश्वर राय

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कतने दिवाली अइली गइली, हमके ना बुझाइल हम कतने मरीचा खा गइलीं, हमके ना बुझाइल बचपन- जवानी के मजा किनारी काट लिहलस कब चुप्पे बुढ़ौती आ गइली, हमके ना बुझाइल। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

तिरंगा: उमेश कुमार राय

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बलिदानियन के शान ह तिरंगा देशवासी के गुमान ह तिरंगा देशवा के पहचान ह तिरंगा जवानन के अभिमान ह तिरंगा। कवियन के मधुर गान ह तिरंगा खेलाड़ी के विजय भान ह तिरंगा गवईयन के सरगम तान ह तिरंगा शहादत के शौर्य बखान ह तिरंगा। देश के काम के अगुआन ह तिरंगा माँ भारती के माथे प चान ह तिरंगा करम योगी के अभियान ह तिरंगा सभे महानो में महान ह तिरंगा। उमेश कुमार राय ग्राम+पोस्ट- जमुआँव थाना- पिरो जिला- भोजपुर, आरा (बिहार)

खतम बा: हरेश्वर राय

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  बसंत के बहार खतम बा नदिया के धार खतम बा मन में भरम जिंदा बड़ुए पाँख के संसार खतम बा। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.

आनंदे साहित्य के संजीवनी ह: डॉ. ब्रजभूषण मिश्र के आलोचना कर्म पर एगो नज़र- विष्णुदेव तिवारी

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भोजपुरी आलोचना में, अपना सहृदयता, तटस्थता, विधि-निषेध सम्मत विनयशीलता, वैज्ञानिकता आ सहज सरलता ख़ातिर ख्यात, डॉ. ब्रजभूषण मिश्र के योगदान महत्वपूर्ण बा। उनकरा आलोचना के आधार कृति बा, कृतिकार के जाति, धर्म, विचारधारा आ परवरिश ना। ऊ जतना सहृदयता से गुलरेज शहजाद के कृति चंपारन सत्याग्रह-गाथा पर 'उहे भूमि बाटे चम्पारन' शीर्षक से बात करेलन ओतने सहृदयता से अरुण त्रिपाठी 'अशेष' रचित 'प्रेमायन' पर 'प्रेमायन: रामकाव्य परंपरा में भोजपुरी के अवदान' शीर्षक से बतियावे लन आ बिना आपन कवनो विचार बोवले, रचयिता लोगन के कृतियन तक पहुँचे के सुंदर राह देखा देलन। रुचिकर आ प्रसंगानुकूल भाषा के प्रयोग से मिश्र जी के आलोचना में शास्त्रीय गरिमा के निर्वाह भइल सुखद लागेला। 'प्रेमायन' के आलोचना के क्रम में ऊ लिखत बाड़े- "कवनो महाकाव्य खातिर ओह में महत् उद्देश्य भइल जरुरी होला। महाकाव्य अपना पूर्वर्ती युग के अध्ययन करेला, वर्तमान के निरखेला आ भविष्य के पूर्वासित करेला, काहे कि ओकरा अपना दा़यित्व के ज्ञान रहेला आ समसामयिक समाज के उन्नति के महान उद्देश्य ओकरा सोझा होला।...

बाकुड़ों की बलिदानी: उमेश कुमार राय

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ठंडा खुनवा भी छनहीं में उबली-गरमाई। सुतल गुमान छनही में अउजाई-अकुलाई। फाँसी-गोली अब रउरा नजरी प नचिहे, भगत-आजाद के जसहीं याद झीमीलाई। हाहाकार अउर भगदड़ शत्रुदल में भईलन। जब टाप के सुर तेगा-तलवार से मिललन। गंगा माई कटल बांह बाकुड़ा के थाम लेली, कुंवर सिंह तब आजादी साथ नाम जुड़लन खोरिया में लोगन के बतकुचन अगराईल । बतिया के छिंउकी से खुशी हकाईल। नयका सबेरवा जयहिन्द से गुंजे लागल , हाथ में तिरंगा जयघोष साथे सवाराईल । लक्ष्मी,नाना, सुभाष के लोगवा बिसारल। संघर्ष काल की कृति आजादी बाद बगादल महल-अटारी से ऊँचा आपन शान करके, ईमान,रीति,नीति के छनिक लोभे हेरावल। अकिल के नकल प बा सभे केहु अझुराईल। सत्य-अहिंसा सब नेताजी लोग भुलाईल। अंजू-पंजू मिल देश के खिल्ली उड़ावस। देख राजघाट से गाँधीजी के मती हेराईल। उमेश कुमार राय ग्राम+पोस्ट- जमुआँव थाना- पिरो जिला- भोजपुर, आरा (बिहार)

दिवलिया प: हरेश्वर राय

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हमार निकलल देवाला दिवलिया प भइली बगली कंगाल कनबलिया प हार मेहरी के महंगा किनाइल असों माल बाकी बिगाइल ओठललिया प। हरेश्वर राय, सतना, म.प्र.