नन्हा कलाकार: हरेश्वर राय
नन्हा कलाकार: हरेश्वर राय बात थोड़ी पुरानी है। कैमूर के पहाड़ी क्षेत्र में पत्थर तोड़ने वाले मजदूरों का एक छोटा सा गाँव था गुहाग्राम। वहाँ शिवकुमार नामक एक अधेड़ उम्र का मजदूर रहता था। उसके विट्टू नाम का एक लड़का था। वह था तो एक पैर से विकलांग परन्तु अत्यन्त ही समझदार एवं मधुरभाषी था। उसके गाँव के सभी लोग उसे बहुत चाहते थे। गाँव से थोड़ी ही दूरी पर एक प्राकृतिक गुफा थी। उसे देखने के लिए साल भर पर्यटकों की भीड़ लगी ही रहती थी। विट्टू उसी गुफा के मुख्य द्वार के बगल में प्रतिदिन छेनी-हथौड़ी लेकर पत्थरों को तराशने में व्यस्त रहता था। लगन, परिश्रम एवं निरंतर अभ्यास ने विट्टू को एक अच्छा मूर्तिकार बना दिया। धीरे-धीरे उसकी कला इतनी निखर गई कि उसके द्वारा बनाई गई मूर्तियाँ सजीव प्रतीत होने लगीं। अब उनकी अच्छी-खासी कीमत भी मिलने लगी। विट्टू की अधिकांश मूर्तियाँ पहाड़ी जीवन पर आधारित हुआ करती थीं। एक बार की बात है। एक पर्यटक की नजर गुफा द्वार पर सजी कलात्मक मूर्तियों पर पड़ी। पर्यटक आश्चर्यचकित रह गया। दरअसल वह पर्यटक मूर्तिकला विशेषज्ञ था। उसकी नजर विट्टू पर पड़ी जो तन्मयता से एक बाल-श्रमिक की मूर्ति तराश...